सहारनपुर : पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला आतंकवादियों शरणस्थली बना हुआ है। आतंकी संगठनों से जुड़े लोग फतवों की नगरी देवबंद समेत सहारनपुर में कई जगहों को अपना ठिकाना बना चुके हैं। जहां से कई बड़ी आतंकी घटनाओं की साजिश रची जा चुकी है। हालांकि समय रहते यूपी ATS और NIA की सतर्कता से इन साजिशों को नाकाम किया गया। सहारनपुर से आतंकी संगठनों से जुड़े कई संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं। बाबजूद इसके आतंकियों का सहारनपुर से कनेक्शन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। डॉ आदिल के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर यूपी का सहारनपुर जिला सुर्खियों में बना हुआ है। डॉ के भेष में छुपे आतंकी आदिल की गिरफ्तारी के बाद भारी मात्रा मे विस्फोटक और लखनऊ से महिला डाक्टर समेत कई की गिरफ्तारी के कनेक्शन भी सहारनपुर से जुड़े मिले हैं। हैरत की बात तो ये भी है कि आतंक के डॉ आदिल आतंकी संगठन से ही जुड़े डॉ मुजमिल्ल को भी सहारनपुर लाना चाहता था जिससे अपने मंसूबों को बखूबी अंजाम दे सके। लेकिन जम्मू पुलिस ने आदिल को गिरफ्तार कर उनके मंसूबों पर पानी फ़ेर दिया।

आगे पढ़िए आतंकी आदिल से जुड़ी पूरी कहानी…..
दरअसल जैश-ए-मोहम्मद में शामिल होने के बाद डॉ. आदिल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अपना ठिकाना बनाना था। इसके लिए वह किसी नौकरी की तलाश में था। जानकारी के अनुसार डॉ आदिल ने डॉ मुज़म्मिल के सुझाव पर ऑस्कर ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स की वेबसाइट पर नौकरी के लिए आवेदन किया। जो हरियाणा का एक बड़ा समूह है जिसके देश भर में अस्पताल खुले हुए हैं। इस ग्रुप का मुख्य कार्यालय रोहतक में है। आवेदन के दौरान आदिल ने अपनी पहली पसंद सहारनपुर बताया था। आवेदन के बाद उसका साक्षात्कार हुआ और दिल्ली रोड़ के वी.ब्रॉस अस्पताल के लिए चयन हो गया। जिसके बाद आदिल ने l जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में डॉक्टर की नौकरी छोड़ दी। गया और 24 नवंबर 2024 को चार लाख रुपये के वेतन पर V BROSS ज्वाइन कर लिया। मार्च 2025 में आदिल V BROSS की नौकरी छोड़ पाँच लाख रुपये के वेतन पर अंबाला रोड के फेमस मेडिकेयर अस्पताल में आ गए।
जांच एजेंसियों की पूछताछ के बाद जो खुलासे हो रहे हैं वे सभी चौकाने वाले हैं। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े सक्रिय सदस्य डॉ. आदिल का पश्चिमी उत्तर प्रदेश आना एक बड़ी योजना का हिस्सा था। वह सहारनपुर को जैश-ए-मोहम्मद के नए अड्डे के रूप में विकसित कर चाहता था। उसकी योजना वहाँ एक भर्ती कमांड सेंटर स्थापित करने की थी। वह लोगों का ब्रेनवॉश करके उन्हें आतंकी संगठन में शामिल करने का अभियान चला रहा था। धीरे धीरे डॉ आदिल ने कई युवाओं से संपर्क भी कर लिया था। सूत्रों की माने तो धार्मिक शिक्षा और एमबीबीएस कर रहे छात्र उसके संपर्क में थे। सुरक्षा एजेंसियों को डॉ. आदिल के मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जिसके आधार पर सुरक्षा एजेंसियां जिले के धार्मिक संस्थानों और छात्रावासों में रहने वाले बाहरी छात्रों की जाँच कर रही हैं।अब तक की जाँच में पता चला है कि डॉ. आदिल अपने साथी डॉ. मुज़म्मिल को भी सहारनपुर लाना चाहता था। इसके लिए उसने अस्पताल प्रबंधन से उसकी बात भी करवा दी थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन उनके मंसूबों से अंजान था। अस्पताल के एक स्टाफ़ ने बताया कि आदिल हाल ही में किराए के दो मकान बदल चुका था। वह ऐसे इलाके में रहता था जहाँ सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे।
सूत्र बताते हैं कि आठ लोग देर रात में उसके घर आते थे और कभी-कभी तो रात भर वहीं रुकते थे। खाने के लिए वह ऑनलाइन खाना ऑर्डर करता था। ऐसे लगभग 15 लोग एजेंसियों के रडार पर हैं। डॉ आदिल की गिरफ्तारी के बाद एनआईए, एटीएस, एसटीएफ, आईबी और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें लगातार सहारनपुर में डेरा डाले हुए हैं। इससे कई सवाल उठते हैं, जैसे: डॉ. आदिल ने सहारनपुर को ही क्यों चुना? वह यहाँ किसे निशाना बना रहा था? उसने कितने लोगों से संपर्क किया? उसने कहाँ मकान किराए पर लिए? उसने मकान क्यों छोड़े?
मिली जानकारी के अनुसार देवबंद क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज और दारुल उलूम में 200 से ज़्यादा कश्मीरी छात्र पढ़ते हैं। ये छात्र इन आतंकवादियों के निशाने पर थे। इनका उद्देश्य युवाओं को कट्टरपंथी बनाना था। वे उनका ब्रेनवॉश करके उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करना चाहते थे। डॉ. आदिल और उनके साथी देश के भीतर एक आतंकवादी नेटवर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे।
अस्पताल से लगभग 500 मीटर की दूरी पर एक गर्ल्स इंटर कॉलेज, एक बॉयज इंटर कॉलेज, एक इस्लामिया इंटर कॉलेज और एक डिग्री कॉलेज है। आशंका जताई जा रही है कि डॉ. आदिल वहाँ पढ़ने वाले छात्रों से संपर्क करता था। डॉ. आदिल दो दरवाज़ों वाले एक अलग घर में रहता था। डॉ. आदिल ने जिन दो घरों को किराए पर लिया था उनमें एक बात समान थी। आदिल दो दरवाज़ों वाले घरों की तलाश करता था। अगर कोई एक दरवाज़े से अंदर आता, तो दूसरे दरवाज़े से बाहर निकल सकता था। वह दूसरे दरवाज़े को अंदर से बंद रखता था। वह सुनसान और एकांत जगहों की तलाश करता था, जहाँ आस-पास कोई सीसीटीवी कैमरा न हो।
उनके विभिन्न आवासों के पड़ोसियों का कहना है कि डॉ. आदिल कभी किसी से मिले या बात नहीं की। दोनों अस्पतालों में उनकी ड्यूटी का समय सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक था। शाम 6 बजे घर लौटने के बाद, उन्हें घर में ही रहना पड़ता था। उनका खाना भी ऑनलाइन मँगवाया जाता था। रात में अक्सर उनके घर के बाहर गाड़ियाँ आ जाती थीं।

